केंद्रीय आर्थिक समीक्षा 2025-26: तेज विकास, मजबूत आधार और लचीली अर्थव्यवस्था की ओर अग्रसर भारत
भारत की अर्थव्यवस्था वित्त वर्ष 2025-26 में मजबूत व्यापक आर्थिक आधार, स्थिर नीतिगत समर्थन, नियंत्रित महंगाई, बढ़ते निवेश, मजबूत निर्यात और विस्तृत वित्तीय समावेशन के बल पर उल्लेखनीय गति के साथ आगे बढ़ी है। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं, भू-राजनीतिक तनावों और व्यापारिक चुनौतियों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था ने अपनी लचीलापन क्षमता को सिद्ध किया है।
आर्थिक समीक्षा 2025-26 यह दर्शाती है कि भारत केवल तेज विकास की ओर ही नहीं बढ़ रहा, बल्कि समावेशी, टिकाऊ और दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता की मजबूत नींव भी तैयार कर रहा है।
मुख्य बिंदु
- वित्त वर्ष 2027 में भारत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 6.8% से 7.2% रहने का अनुमान।
- वित्त वर्ष 2026 में वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 7.4% रहने का अनुमान।
- अप्रैल-दिसंबर 2025 के दौरान औसत खुदरा महंगाई दर केवल 1.7%, जो ऐतिहासिक रूप से सबसे निम्न स्तरों में से एक है।
- कृषि, उद्योग और सेवा—तीनों क्षेत्रों ने विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
- वित्त वर्ष 2025 में भारत का कुल निर्यात बढ़कर 825.3 बिलियन अमेरिकी डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा।
- सेवा निर्यात 387.5 बिलियन अमेरिकी डॉलर के उच्चतम स्तर पर पहुंचा।
- विदेशी मुद्रा भंडार 701.4 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंचा।
- रेपो दर घटाकर 5.25% की गई, जिससे निवेश और क्रेडिट प्रवाह को समर्थन मिला।
- प्रत्यक्ष कर संग्रह और जीएसटी संग्रह में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई।
- वित्तीय समावेशन, रोजगार, डिजिटल भुगतान और पूंजीगत व्यय में निरंतर विस्तार हुआ।
प्रस्तावना
भारत वित्त वर्ष 2026 में मजबूत आर्थिक गति के साथ प्रवेश कर चुका है। स्थिर व्यापक आर्थिक नीतियों, बेहतर राजकोषीय प्रबंधन, नियंत्रित मुद्रास्फीति, बढ़ती घरेलू मांग और मजबूत वित्तीय प्रणाली ने अर्थव्यवस्था को स्थायित्व प्रदान किया है।
सरकार की समन्वित राजकोषीय, मौद्रिक और संरचनात्मक नीतियों ने निवेश, खपत, उत्पादन और समावेशन को गति दी है। इससे भारत की अर्थव्यवस्था न केवल वैश्विक चुनौतियों का सामना करने में सक्षम बनी है, बल्कि दीर्घकालिक विकास क्षमता भी मजबूत हुई है।
अर्थव्यवस्था की स्थिति
1. विकास का आउटलुक : जीडीपी और मांग की स्थिति
भारत की आर्थिक वृद्धि मजबूत बनी हुई है। प्रथम अग्रिम अनुमानों के अनुसार—
- वित्त वर्ष 2026 में वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर : 7.4%
- सकल मूल्य वर्धित (GVA) वृद्धि दर : 7.3%
मजबूत कृषि प्रदर्शन से ग्रामीण आय और मांग में सुधार हुआ है, जबकि कर संरचना के सुव्यवस्थीकरण से शहरी खपत में वृद्धि देखी गई है।
भारत की मध्यमकालिक विकास क्षमता को देखते हुए वित्त वर्ष 2027 में वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 6.8% से 7.2% रहने का अनुमान है।
महंगाई की स्थिति और भविष्य की संभावनाएं
भारत में खुदरा मुद्रास्फीति ऐतिहासिक रूप से निम्न स्तर पर पहुंच गई है।
- अप्रैल-दिसंबर 2025 के दौरान औसत सीपीआई मुद्रास्फीति : 1.7%
- इसका प्रमुख कारण खाद्य एवं ईंधन कीमतों में नरमी रहा।
प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में भारत ने 2025 में महंगाई में सबसे तेज गिरावट दर्ज की।
आरबीआई ने वित्त वर्ष 2026 के लिए मुद्रास्फीति अनुमान को घटाकर 2.0% कर दिया, जबकि आईएमएफ ने:
- वित्त वर्ष 2026 : 2.8%
- वित्त वर्ष 2027 : 4.0%
मुद्रास्फीति का अनुमान व्यक्त किया है।
अनुकूल आपूर्ति परिस्थितियों, बेहतर कृषि उत्पादन और जीएसटी दरों के सुव्यवस्थीकरण से भविष्य में भी मुद्रास्फीति नियंत्रित रहने की संभावना है।
विकास के क्षेत्रीय कारक
1. कृषि क्षेत्र : ग्रामीण मांग का आधार
कृषि और संबद्ध गतिविधियां भारत की अर्थव्यवस्था में स्थिरता प्रदान करने वाली प्रमुख शक्ति बनी हुई हैं।
- वित्त वर्ष 2026 में कृषि क्षेत्र की वृद्धि दर : 3.1%
- कृषि जीवीए में पहली छमाही के दौरान : 3.6% वृद्धि
अनुकूल मानसून और बेहतर फसल उत्पादन ने ग्रामीण आय और मांग को मजबूत किया।
संबद्ध गतिविधियों का प्रदर्शन
- पशुपालन और मत्स्य पालन में : 5-6% स्थिर वृद्धि
- इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था में विविधीकरण और स्थायित्व बढ़ा।
2. उद्योग और विनिर्माण क्षेत्र : तेजी से बढ़ती गति
वित्त वर्ष 2026 में औद्योगिक क्षेत्र की वृद्धि दर 6.2% रहने का अनुमान है।
पहली छमाही में औद्योगिक वृद्धि:
- वित्त वर्ष 2026 : 7.0%
- वित्त वर्ष 2025 : 6.1%
- कोविड-पूर्व औसत : 5.2%
विनिर्माण क्षेत्र की मजबूती
विनिर्माण क्षेत्र प्रमुख विकास इंजन के रूप में उभरा—
- पहली तिमाही GVA वृद्धि : 7.72%
- दूसरी तिमाही GVA वृद्धि : 9.13%
पीएलआई योजना का प्रभाव
14 क्षेत्रों में लागू उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजना के तहत:
- ₹2 लाख करोड़ से अधिक निवेश आकर्षित
- ₹18.7 लाख करोड़ से अधिक अतिरिक्त उत्पादन/बिक्री
- सितंबर 2025 तक 12.6 लाख से अधिक रोजगार सृजित
नवाचार में प्रगति
वैश्विक नवाचार सूचकांक में भारत की रैंक:
- 2019 : 66वां स्थान
- 2025 : 38वां स्थान
3. सेवा क्षेत्र : विकास का सबसे बड़ा इंजन
सेवा क्षेत्र भारतीय अर्थव्यवस्था का सबसे मजबूत स्तंभ बना हुआ है।
- वित्त वर्ष 2026 में सेवा क्षेत्र वृद्धि दर : 9.1%
- वित्त वर्ष 2025 : 7.2%
जीडीपी में सेवा क्षेत्र की हिस्सेदारी
- जीडीपी में हिस्सेदारी : 53.6%
- GVA में हिस्सेदारी : 56.4% (रिकॉर्ड स्तर)
भारत अब सेवा निर्यात के क्षेत्र में दुनिया का सातवां सबसे बड़ा निर्यातक बन चुका है।
- वैश्विक सेवा व्यापार में भारत की हिस्सेदारी:
- 2005 : 2%
- 2024 : 4.3%
यह क्षेत्र प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) का सबसे बड़ा प्राप्तकर्ता बना हुआ है।
रोजगार और श्रम बाजार
भारत का श्रम बाजार लगातार मजबूत हो रहा है।
- वित्त वर्ष 2026 की दूसरी तिमाही में कुल रोजगार : 56.2 करोड़
- पहली तिमाही की तुलना में लगभग 8.7 लाख नए रोजगार सृजित हुए।
प्रमुख श्रम संकेतक
- श्रम बल सहभागिता दर (LFPR) : 56.1%
- महिला LFPR : 35.3%
- श्रमिक जनसंख्या अनुपात (WPR) : 53.4%
- बेरोजगारी दर घटकर : 4.8%
संगठित विनिर्माण क्षेत्र
- रोजगार में : 6% वार्षिक वृद्धि
- 10 लाख से अधिक नए रोजगार
ई-श्रम पोर्टल
- 31 करोड़ से अधिक असंगठित श्रमिक पंजीकृत
- इनमें 54% से अधिक महिलाएं
राष्ट्रीय कैरियर सेवा (NCS)
- 59 करोड़ से अधिक नौकरी चाहने वाले पंजीकृत
- लगभग 8 करोड़ रिक्तियां दर्ज
व्यापार और निर्यात प्रदर्शन
भारत का निर्यात लगातार नए रिकॉर्ड बना रहा है।
- वित्त वर्ष 2025 कुल निर्यात : 825.3 बिलियन डॉलर
- वित्त वर्ष 2026 की पहली छमाही : 418.5 बिलियन डॉलर
वैश्विक व्यापार में भारत की हिस्सेदारी
- 2005 : 1%
- 2024 : 1.8%
सेवा निर्यात
- वित्त वर्ष 2025 : 387.5 बिलियन डॉलर
- वार्षिक वृद्धि : 13.6%
आईटी, वित्तीय और पेशेवर सेवाओं की वैश्विक मांग ने भारत की स्थिति को और मजबूत किया।
बाहरी क्षेत्र और विदेशी मुद्रा भंडार
- विदेशी मुद्रा भंडार : 701.4 बिलियन डॉलर
- लगभग 11 महीनों के आयात को कवर करने में सक्षम
- बाहरी ऋण का 94% से अधिक कवर
रेमिटेंस
भारत विश्व का सबसे बड़ा रेमिटेंस प्राप्तकर्ता बना रहा।
- वित्त वर्ष 2025 : 135.4 बिलियन डॉलर
औद्योगिक उत्पादन
दिसंबर 2025 में औद्योगिक उत्पादन में उल्लेखनीय तेजी देखी गई।
- IIP वृद्धि दर : 7.8%
- नवंबर 2025 : 7.2%
क्षेत्रवार वृद्धि
- विनिर्माण : 8.1%
- खनन : 6.8%
- बिजली : 6.3%
प्रमुख उद्योगों का प्रदर्शन
- कंप्यूटर एवं इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद : 34.9%
- मोटर वाहन : 33.5%
- अन्य परिवहन उपकरण : 25.1%
- सीमेंट : 13.5%
- इस्पात : 6.9%
राजकोषीय उन्नति
मजबूत राजकोषीय विश्वसनीयता
भारत को 2025 में तीन प्रमुख वैश्विक एजेंसियों से सॉवरेन क्रेडिट रेटिंग अपग्रेड प्राप्त हुए:
- Morningstar DBRS
- S&P Global Ratings
- R&I Inc.
कर संग्रह में सुधार
- केंद्र की राजस्व प्राप्तियां जीडीपी के 9.2% तक पहुंचीं।
- प्रत्यक्ष करों की हिस्सेदारी बढ़कर 58.8% हुई।
आयकर आधार का विस्तार
- आयकर रिटर्न दाखिल करने वाले:
- वित्त वर्ष 2022 : 6.9 करोड़
- वित्त वर्ष 2025 : 9.2 करोड़
जीएसटी संग्रह
- अप्रैल-दिसंबर 2025 : ₹17.4 लाख करोड़
- वार्षिक वृद्धि : 6.7%
पूंजीगत व्यय और राज्यों की भूमिका
- केंद्र का पूंजीगत व्यय जीडीपी के 4% तक पहुंचा।
- राज्यों को विशेष सहयोग योजना (SASCI) के माध्यम से पूंजीगत खर्च बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया गया।
मौद्रिक और वित्तीय क्षेत्र
रेपो दर में कटौती
आरबीआई ने अप्रैल-दिसंबर 2025 के दौरान रेपो दर में कुल 100 बेसिस प्वाइंट की कटौती की।
- वर्तमान रेपो दर : 5.25%
नकद आरक्षित अनुपात (CRR)
- घटाकर : 3%
तरलता प्रबंधन
- ओपन मार्केट ऑपरेशन (OMO) के माध्यम से बड़ी मात्रा में तरलता डाली गई।
बैंकिंग क्षेत्र की मजबूती
- सकल एनपीए कई दशकों के न्यूनतम स्तर पर।
- पूंजी पर्याप्तता अनुपात (CRAR) : 17.2%
बैंक लाभ
- वित्त वर्ष 2025 में लाभ वृद्धि : 16.9%
एमएसएमई क्रेडिट
- नवंबर 2025 : 21.8% वृद्धि
वित्तीय समावेशन
आरबीआई का वित्तीय समावेशन सूचकांक:
- मार्च 2024 : 64.2
- मार्च 2025 : 67.0
यह बैंकिंग, बीमा, निवेश और पेंशन सेवाओं की बढ़ती पहुंच को दर्शाता है।
पूंजी बाजार और घरेलू निवेश
- वित्त वर्ष 2026 (दिसंबर 2025 तक) प्राथमिक बाजारों से संसाधन जुटाव : ₹10.7 लाख करोड़
- 2022-2026 के दौरान कुल जुटाव : ₹53 लाख करोड़
घरेलू निवेशकों की भागीदारी
- इक्विटी में हिस्सेदारी बढ़कर : 18.8%
- घरेलू इक्विटी संपत्ति में ₹53 लाख करोड़ की वृद्धि
निष्कर्ष
आर्थिक समीक्षा 2025-26 यह स्पष्ट करती है कि भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत आधार, नियंत्रित महंगाई, बढ़ते निवेश, विस्तृत वित्तीय समावेशन और व्यापक विकास के साथ आगे बढ़ रही है।
कृषि, उद्योग और सेवा क्षेत्र में संतुलित विकास, मजबूत निर्यात, बेहतर रोजगार संकेतक, पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार और स्थिर वित्तीय प्रणाली भारत को वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भी मजबूती प्रदान कर रहे हैं।
राजकोषीय अनुशासन, बढ़ते पूंजीगत व्यय, डिजिटल आर्थिक विस्तार और संरचनात्मक सुधारों के कारण भारत आने वाले वर्षों में विश्व की सबसे तेज गति से विकसित होने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में अपनी स्थिति और मजबूत करने की दिशा में अग्रसर है।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी 2026 (रविवार) को संसद में केंद्रीय बजट 2026-27 प्रस्तुत किया। यह उनके कार्यकाल का लगातार 9वां बजट था, जिसमें "विकसित भारत" के लक्ष्य के तहत बुनियादी ढांचे, युवाओं, और तकनीकी विकास पर ज़ोर दिया गया है।
यह बजट “विकसित भारत 2047” के लक्ष्य को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। बजट का मुख्य उद्देश्य आर्थिक विकास को तेज करना, रोजगार बढ़ाना, तकनीकी आत्मनिर्भरता प्राप्त करना तथा सभी वर्गों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना है।
बजट की तीन मुख्य आधारशिलाएँ
1. आर्थिक विकास को गति देना
सरकार ने विनिर्माण, अवसंरचना, तकनीक और निवेश को बढ़ावा देकर भारत को वैश्विक आर्थिक शक्ति बनाने का लक्ष्य रखा है। वैश्विक अस्थिरता के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूत और प्रतिस्पर्धी बनाने पर विशेष जोर दिया गया है।
2. लोगों की आकांक्षाएँ पूरी करना
युवाओं, महिलाओं, किसानों, उद्यमियों और मध्यम वर्ग को नई सुविधाएँ देकर रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और आय में सुधार करने का प्रयास किया गया है।
3. सबका साथ-सबका विकास
सरकार ने क्षेत्रीय असमानता कम करने तथा सभी राज्यों, समुदायों और वर्गों को विकास में समान अवसर देने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
बजट अनुमान (Budget Estimates)
कुल व्यय
- सरकार ने वर्ष 2026-27 के लिए कुल व्यय ₹53.5 लाख करोड़ निर्धारित किया है। इसमें अवसंरचना, शिक्षा, स्वास्थ्य, रक्षा और कल्याणकारी योजनाओं पर खर्च शामिल है।
गैर-ऋण प्राप्तियां
- सरकार को कर एवं अन्य स्रोतों से ₹36.5 लाख करोड़ प्राप्त होने का अनुमान है।
शुद्ध कर प्राप्तियां
- केंद्र सरकार की शुद्ध कर प्राप्तियां ₹28.7 लाख करोड़ रहने का अनुमान है। इससे सरकारी योजनाओं को वित्तीय मजबूती मिलेगी।
बाजार उधारी
- सरकार ₹17.2 लाख करोड़ की सकल बाजार उधारी करेगी, जबकि शुद्ध बाजार उधारी ₹11.7 लाख करोड़ रहेगी।
राजकोषीय घाटा
- राजकोषीय घाटा GDP का 4.3% रहने का अनुमान है। सरकार ने वित्तीय अनुशासन बनाए रखने का प्रयास किया है।
विनिर्माण एवं औद्योगिक विकास
बायोफार्मा शक्ति योजना
- भारत को वैश्विक बायोफार्मा केंद्र बनाने हेतु ₹10,000 करोड़ का प्रावधान किया गया है। इससे दवा अनुसंधान, जैव-प्रौद्योगिकी और स्वास्थ्य उद्योग को बढ़ावा मिलेगा।
नए NIPER संस्थान
- तीन नए राष्ट्रीय फार्मास्यूटिकल शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान स्थापित किए जाएंगे। नए संस्थानों के साथ-साथ पहले से कार्यरत सात NIPER (मोहाली, हैदराबाद, अहमदाबाद, कोलकाता, गुवाहाटी, हाजीपुर और रायबरेली) को भी अपग्रेड किया जाएगा।इससे फार्मा शिक्षा और अनुसंधान को मजबूती मिलेगी।
क्लिनिकल ट्रायल नेटवर्क
- देशभर में 1000 से अधिक क्लिनिकल ट्रायल केंद्र बनाए जाएंगे, जिससे नई दवाओं के परीक्षण में भारत की क्षमता बढ़ेगी।
इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0
- सरकार ने चिप निर्माण, डिजाइन और सप्लाई चेन को मजबूत करने के लिए नया सेमीकंडक्टर मिशन शुरू करने की घोषणा की है।
इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण
- इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट निर्माण योजना का बजट बढ़ाकर ₹40,000 करोड़ किया गया है। इससे मोबाइल, कंप्यूटर और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का घरेलू उत्पादन बढ़ेगा।
दुर्लभ धातु गलियारे
- ओडिशा, आंध्र प्रदेश, केरल और तमिलनाडु में Rare Earth Corridors बनाए जाएंगे, ताकि रणनीतिक खनिजों का उत्पादन बढ़ाया जा सके।
कैमिकल पार्क
- तीन नए केमिकल पार्क स्थापित किए जाएंगे जिससे रसायन उद्योग में निवेश और रोजगार बढ़ेगा।
पूंजीगत सामान एवं उद्योग
हाईटेक टूल रूम
- सीपीएसई द्वारा हाईटेक टूल रूम स्थापित किए जाएंगे जो कम लागत पर उच्च गुणवत्ता वाले उपकरण तैयार करेंगे।
कंटेनर विनिर्माण योजना
- भारत में कंटेनर निर्माण को बढ़ावा देने के लिए ₹10,000 करोड़ की योजना लाई जाएगी। इससे लॉजिस्टिक लागत कम होगी।
CIE योजना
- निर्माण एवं अवसंरचना उपकरणों के घरेलू उत्पादन को बढ़ाने हेतु नई योजना शुरू होगी।
वस्त्र उद्योग
राष्ट्रीय फाइबर योजना
- सरकार ने प्राकृतिक और कृत्रिम फाइबर में आत्मनिर्भरता के लिए राष्ट्रीय फाइबर योजना की घोषणा की है।
टेक्सटाइल क्लस्टर
- आधुनिक टेक्सटाइल क्लस्टर विकसित किए जाएंगे ताकि रोजगार और निर्यात में वृद्धि हो सके।
मेगा टेक्सटाइल पार्क
- Challenge Mode पर नए मेगा टेक्सटाइल पार्क बनाए जाएंगे जिससे बड़े पैमाने पर निवेश आएगा।
महात्मा गांधी ग्राम स्वराज पहल
- खादी, हथकरघा और हस्तशिल्प को वैश्विक बाजार से जोड़ने के लिए नई पहल शुरू की जाएगी।
MSME एवं उद्यमिता
SME Growth Fund
- MSME क्षेत्र को मजबूत बनाने हेतु ₹10,000 करोड़ का फंड स्थापित किया जाएगा।
आत्मनिर्भर भारत फंड
- ₹2,000 करोड़ का अतिरिक्त समर्थन देकर छोटे उद्योगों को प्रोत्साहन दिया जाएगा।
कॉर्पोरेट मित्र कैडर
- Tier-2 और Tier-3 शहरों में व्यवसायिक सहायता नेटवर्क तैयार किया जाएगा।
अवसंरचना विकास
सार्वजनिक पूंजीगत व्यय
- सरकार ने अवसंरचना निर्माण हेतु ₹12.2 लाख करोड़ का पूंजी निवेश तय किया है।
जोखिम गारंटी फंड
- बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के लिए ऋण सुरक्षा देने हेतु Infrastructure Risk Guarantee Fund बनाया जाएगा।
समर्पित माल गलियारा
- डानकूनी से सूरत तक नया Dedicated Freight Corridor बनाया जाएगा।
राष्ट्रीय जलमार्ग
- अगले 5 वर्षों में 20 नए राष्ट्रीय जलमार्ग शुरू किए जाएंगे।
तटीय कार्गो योजना
- 2047 तक जलमार्ग परिवहन की हिस्सेदारी 12% तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है।
सी-प्लेन योजना
- दूरदराज क्षेत्रों और पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए Sea Plane सेवा शुरू होगी।
ऊर्जा एवं पर्यावरण
CCUS तकनीक
- CO_2 - Capture - Utilization - Storage
सरकार ने कार्बन उत्सर्जन कम करने के लिए Carbon Capture Utilization and Storage तकनीक हेतु ₹20,000 करोड़ आवंटित किए हैं।
ऊर्जा सुरक्षा
- बैटरी निर्माण और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए कई सीमा शुल्क छूट दी गई हैं।
न्यूक्लियर पावर
- न्यूक्लियर परियोजनाओं के लिए आवश्यक सामग्रियों पर सीमा शुल्क छूट 2035 तक जारी रहेगी।
शिक्षा एवं कौशल विकास
शिक्षा से रोजगार समिति
- सेवा क्षेत्र में रोजगार बढ़ाने हेतु उच्चाधिकार प्राप्त समिति गठित की जाएगी।
Allied Health Professionals
- अगले 5 वर्षों में 1 लाख स्वास्थ्य पेशेवर तैयार किए जाएंगे।
वृद्ध देखभाल
- 1.5 लाख देखभाल सेवा प्रदाताओं को प्रशिक्षित किया जाएगा।
विश्वविद्यालय टाउनशिप
- औद्योगिक कॉरिडोर के आसपास 5 University Townships विकसित की जाएंगी।
महिला छात्रावास
- प्रत्येक जिले में महिला छात्रावास बनाए जाएंगे।
आयुष एवं स्वास्थ्य
नए आयुर्वेद संस्थान
- तीन नए अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान स्थापित होंगे।
WHO पारंपरिक चिकित्सा केंद्र
- जामनगर स्थित केंद्र को वैश्विक स्तर पर उन्नत बनाया जाएगा।
मानसिक स्वास्थ्य
- उत्तर भारत में NIMHANS-2 की स्थापना तथा रांची और तेजपुर संस्थानों का उन्नयन किया जाएगा।
पशुपालन
पशु चिकित्सक
- 20,000 से अधिक पशु डॉक्टर उपलब्ध कराए जाएंगे।
निजी पशु चिकित्सा संस्थान
- निजी क्षेत्र में पशु अस्पताल, प्रयोगशालाएं और प्रशिक्षण केंद्र विकसित किए जाएंगे।
पर्यटन एवं संस्कृति
राष्ट्रीय आतिथ्य संस्थान
- होटल प्रबंधन एवं पर्यटन शिक्षा को मजबूत करने के लिए नया संस्थान स्थापित किया जाएगा।
पर्यटन गाइड प्रशिक्षण
- 20 पर्यटन स्थलों पर 10,000 गाइडों को प्रशिक्षित किया जाएगा।
डिजिटल नॉलेज ग्रिड
- सभी सांस्कृतिक एवं धार्मिक स्थलों का डिजिटल दस्तावेज तैयार किया जाएगा।
विरासत स्थल विकास
- लोथल, धौलावीरा, सारनाथ, हस्तिनापुर और लेह पैलेस सहित 15 स्थलों को विश्वस्तरीय पर्यटन केंद्र बनाया जाएगा।
खेल
खेलो इंडिया मिशन
- अगले दशक में खेल अवसंरचना और प्रतिभा विकास के लिए नई योजना शुरू होगी।
कृषि एवं किसान
उच्च मूल्य कृषि
- नारियल, काजू, कोको, चंदन और Dry Fruits जैसी फसलों को बढ़ावा दिया जाएगा।
भारत-विस्तार AI प्लेटफॉर्म
- किसानों को बहुभाषीय AI आधारित कृषि सलाह उपलब्ध कराई जाएगी।
मत्स्य एवं जलाशय विकास
- 500 जलाशयों और अमृत सरोवरों का विकास किया जाएगा।
पूर्वोदय एवं पूर्वोत्तर विकास
पर्यटन एवं परिवहन
- पूर्वोत्तर राज्यों में 5 नए पर्यटन स्थल और 4000 ई-बसें उपलब्ध कराई जाएंगी।
बौद्ध सर्किट
- अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, असम, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में बौद्ध पर्यटन विकसित किया जाएगा।
प्रत्यक्ष कर सुधार
नया आयकर अधिनियम 2025
- 1 अप्रैल 2026 से नया Income Tax Act लागू होगा।
विदेश यात्रा TCS
- विदेश यात्रा पैकेज पर TCS दर घटाकर 2% की गई।
संशोधित रिटर्न
- Updated Return की अंतिम तिथि 31 मार्च तक बढ़ाई गई।
अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क
व्यक्तिगत आयात
- व्यक्तिगत उपयोग की वस्तुओं पर टैरिफ 20% से घटाकर 10% किया गया।
दवाओं पर राहत
- 17 दवाओं पर सीमा शुल्क हटाया गया।
ई-कॉमर्स निर्यात
- Courier Export की ₹10 लाख सीमा समाप्त कर दी गई।
नोट: केंद्रीय बजट 2026-27 में विशेष आर्थिक क्षेत्रों (एसईजेड) की योग्य विनिर्माण इकाइयों को रियायती दर पर घरेलू शुल्क क्षेत्र में बिक्री की सुविधा प्रदान करने के लिए एक विशेष एकमुश्त उपाय प्रस्तावित किया गया है। ऐसी बिक्री की मात्रा उनके निर्यात के एक निर्धारित अनुपात तक सीमित होगी। 28 फरवरी, 2026 तक भारत में 368 अधिसूचित एसईजेड हैं। 2025-26 (दिसंबर, 2025 तक) में कार्यान्वित एसईजेड से निर्यात 11.70 लाख करोड़ रुपये से अधिक रहा, जो 2024-25 की इसी अवधि की तुलना में 32.02% की बढ़ोतरी है।
विशेष आर्थिक क्षेत्र (एसईजेड) किसी देश के भीतर नामांकित ऐसे क्षेत्र होते हैं, जो व्यापार एवं निवेश को प्रोत्साहन देने के लिए एक विशिष्ट नियामक एवं वित्तीय ढांचे के अंतर्गत कार्य करते हैं। अतिरिक्त आर्थिक गतिविधि निर्माण करने, निर्यात को प्रोत्साहन देने, घरेलू एवं विदेशी निवेश आकर्षित करने, रोजगार के अवसर पैदा करने और विश्व स्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने के उद्देश्यों से स्थापित एसईजेड निर्यात-आधारित विकास के इंजन के तौर पर कार्य करते हैं।
एसईजेड एक विशेष रूप से सीमांकित शुल्क-मुक्त क्षेत्र है और इसे अधिकृत संचालन के लिए भारत के सीमा शुल्क क्षेत्र से बाहर का क्षेत्र माना जाता है। एसईजेड इकाइयां वस्तुओं के निर्माण, सेवाओं के प्रावधान और मुक्त व्यापार भंडारण क्षेत्रों के माध्यम से भंडारण सेवाएं प्रदान करने के लिए स्थापित की जाती हैं।
भारत में, विशेष आर्थिक क्षेत्रों (एसईजेड) ने आर्थिक परिदृश्य को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। मई 2005 में एसईजेड अधिनियम लागू होने के बाद से, इन क्षेत्रों ने निर्यात में बढ़ोतरी को उल्लेखनीय रूप से तेजी प्रदान की है और साथ ही कई क्षेत्रों में औद्योगिक विस्तार को बढ़ावा दिया है। विदेशी मुद्रा कमाने और बुनियादी ढांचे के निर्माण के अलावा, एसईजेड ने प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार निर्माण, नए व्यावसायिक पारिस्थितिकी तंत्र के उद्गमन और बेहतर सामाजिक-आर्थिक परिणामों के माध्यम से स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं के समग्र विकास में योगदान दिया है।
वर्तमान में, 28 फरवरी, 2026 तक भारत भर में 368 अधिसूचित विशेष औद्योगिक क्षेत्र (एसईजेड) हैं। वित्तीय प्रोत्साहन, सरल नियामक प्रक्रियाओं और आधुनिक बुनियादी ढांचे की पेशकश कर, एसईजेड ने भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को बेहतर किया है। इन्होंने विशेष औद्योगिक समूहों के विकास को सुगम बनाया है, नवाचार और तकनीकी प्रगति को प्रोत्साहित किया है, और भारत को वैश्विक बाजार में एक आकर्षक और विश्वसनीय निवेश गंतव्य के रूप में स्थापित किया है।
निष्कर्ष
केंद्रीय बजट 2026-27 भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में एक दीर्घकालिक और व्यापक रोडमैप प्रस्तुत करता है। इसमें विनिर्माण, तकनीक, हरित ऊर्जा, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, अवसंरचना और रोजगार पर विशेष ध्यान दिया गया है। यह बजट आर्थिक विकास के साथ-साथ सामाजिक समावेशन और क्षेत्रीय संतुलन को भी मजबूत करने का प्रयास करता है।

विकसित भारत @2047
CLASS NOTES | By- Santosh Kashyap
Faculty of IR
@Bihar Naman Gs
For: 71st & 72nd BPSC Mains Class
Date: 20.03.2026
प्रस्तावना
15 अगस्त 1947 को जब भारत ने "नियति के साथ साक्षात्कार" (Tryst with Destiny) किया था, तब लक्ष्य औपनिवेशिक बेड़ियों को तोड़ना था। लेकिन 15 अगस्त 2047 का लक्ष्य वैश्विक मंच पर एक 'अग्रणी महाशक्ति' के रूप में स्थापित होना है। विकसित भारत 2047 केवल एक प्रशासनिक लक्ष्य नहीं है, बल्कि यह एक सभ्यतागत पुनरुत्थान है। यह विजन दस्तावेज़ भारत को $30 ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था बनाने और प्रति व्यक्ति आय को विकसित देशों के समकक्ष ले जाने का एक साहसिक संकल्प है।
'विकसित भारत 2047' प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक बड़ा सपना और संकल्प है। उनका मानना है कि जब भारत अपनी आजादी के 100 साल पूरे करेगा, तब हमारा देश दुनिया के सबसे अमीर और ताकतवर देशों की गिनती में सबसे आगे होना चाहिए। मोदी जी ने इस मिशन की शुरुआत 11 दिसंबर 2023 को की थी और इसे सफल बनाने के लिए उन्होंने 4 मुख्य स्तंभों (G.Y.A.N.) पर जोर दिया है:
- G - गरीब: जिनका जीवन स्तर सुधारना है।
- Y - युवा: जो देश का भविष्य हैं।
- A - अन्नदाता (किसान): जो देश का पेट भरते हैं।
- N - नारी शक्ति: जो विकास का नेतृत्व करेंगी।
अब इसे और अच्छे से समझने का प्रयास करते हैं जिसमें हम भारत और बिहार दोनों का परिप्रेक्ष्य देखेंगे-

मुख्य भाग
अध्याय 1: विकसित भारत के चार अभेद्य स्तंभ (GYAN)
प्रधानमंत्री के विजन के अनुसार, विकसित भारत की इमारत चार मुख्य स्तंभों पर टिकी है। इन स्तंभों का सुदृढ़ीकरण ही देश की नियति तय करेगा:
1.1 गरीब: गरिमापूर्ण जीवन का अधिकार
- 'शून्य गरीबी' का लक्ष्य केवल आय बढ़ाने तक सीमित नहीं है। इसमें बहुआयामी गरीबी सूचकांक (MPI) को समाप्त करना शामिल है।
- जन धन-आधार-मोबाइल (JAM) ट्रिनिटी: वित्तीय समावेशन के माध्यम से बिचौलियों का अंत।
- पीएम आवास योजना: 2047 तक हर भारतीय के पास अपना पक्का घर, शौचालय, बिजली और नल से जल होगा।
1.2 युवा: नवाचार के अग्रदूत
- भारत की 65% जनसंख्या कार्यशील आयु वर्ग में है। यह 'डेमोग्राफिक डिविडेंड' ही भारत का सबसे बड़ा हथियार है।
- नई शिक्षा नीति (NEP) 2020: रटने की संस्कृति से हटकर अनुसंधान और कौशल पर जोर।
- अटल टिंकरिंग लैब्स: स्कूली स्तर पर ही पेटेंट और नवाचार की मानसिकता विकसित करना।
1.3 अन्नदाता: वैश्विक खाद्य सुरक्षा का केंद्र
- भारत को 'Food Basket of the World' बनाना लक्ष्य है।
- डिजिटल कृषि मिशन: ड्रोन तकनीक, AI आधारित फसल पूर्वानुमान और ई-नाम (e-NAM) के जरिए बिचौलियों से मुक्ति।
- प्राकृतिक खेती: रसायनों से मुक्ति पाकर मिट्टी की उर्वरता और निर्यात क्षमता बढ़ाना।
1.4 नारी शक्ति: विकास का नेतृत्व
- जब 70% महिलाएं आर्थिक गतिविधियों का हिस्सा बनेंगी, तो भारत की GDP में स्वतः 20-25% की वृद्धि होगी।
- नारी शक्ति वंदन अधिनियम: नीति निर्माण में महिलाओं की प्रत्यक्ष भागीदारी।
- लखपति दीदी योजना: स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था का कायाकल्प।
अध्याय 2: आर्थिक परिवर्तन और बजट 2025-26 के मील के पत्थर
2047 तक $30 ट्रिलियन तक पहुँचने के लिए भारत को निरंतर 8-9% की विकास दर बनाए रखनी होगी। बजट 2025-26 ने इसकी नींव रख दी है:
2.1 आयकर सुधार और घरेलू उपभोग
- आयकर छूट की सीमा को बढ़ाकर ₹12 लाख करना एक रणनीतिक कदम है। इससे मध्यम वर्ग के हाथ में अधिक पैसा बचेगा (Disposable Income), जिससे मांग बढ़ेगी और अंततः विनिर्माण (Manufacturing) को गति मिलेगी।
2.2 MSME और स्टार्टअप इकोसिस्टम
- भारत आज दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम है। सरकार का लक्ष्य इसे नंबर 1 बनाना है। क्रेडिट गारंटी योजनाओं के माध्यम से छोटे उद्योगों को बिना गारंटी के ऋण उपलब्ध कराना उद्यमिता की लोकतांत्रिक व्यवस्था है।
2.3 विदेशी निवेश और व्यापार (FDI & Trade)
- 'मेक इन इंडिया' और 'PLI स्कीम' (Production Linked Incentive) के जरिए भारत को वैश्विक सप्लाई चेन का विकल्प बनाया जा रहा है। एप्पल, सेमीकंडक्टर कंपनियां और टेस्ला जैसे बड़े ब्रांड्स का भारत आना इस दिशा में बड़ा संकेत है।
अध्याय 3: बुनियादी ढांचा और डिजिटल क्रांति
- भौतिक और डिजिटल बुनियादी ढांचा किसी भी विकसित देश की रीढ़ होता है।
3.1 पीएम गति शक्ति: लॉजिस्टिक्स का महासंगम
- भारत में लॉजिस्टिक्स लागत GDP का लगभग 14% है, जिसे 2047 तक 8% से नीचे लाने का लक्ष्य है। रेल, सड़क, जलमार्ग और हवाई मार्गों का एकीकरण माल ढुलाई को तेज और सस्ता बनाएगा।
3.2 डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI)
- UPI, आधार और डिजिलॉकर जैसे नवाचारों ने भारत को दुनिया का 'डिजिटल लीडर' बना दिया है। आज दुनिया के 40% डिजिटल लेनदेन भारत में होते हैं। भविष्य में ब्लॉकचेन और AI आधारित शासन (AI-led Governance) सेवाओं को पारदर्शी बनाएगा।
अध्याय 4: स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक सशक्तिकरण
- एक स्वस्थ और शिक्षित समाज ही विकसित राष्ट्र का निर्माण कर सकता है।
4.1 स्वास्थ्य सेवा (Health for All)
- आयुष्मान भारत: दुनिया की सबसे बड़ी स्वास्थ्य योजना का विस्तार अब हर नागरिक तक करने की योजना है।
- डिजिटल हेल्थ मिशन: हर नागरिक का अपना हेल्थ आईडी होगा, जिससे उपचार में निरंतरता और डेटा आधारित नीतियां बन सकेंगी।
4.2 शिक्षा 4.0
- 2047 तक भारत के विश्वविद्यालय वैश्विक रैंकिंग के शीर्ष 100 में होंगे। कौशल विकास और व्यावसायिक शिक्षा को मुख्यधारा में जोड़ना अनिवार्य है ताकि 100% श्रम बल कुशल हो।
अध्याय 5: ऊर्जा सुरक्षा और पर्यावरणीय स्थिरता
विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन विकसित भारत की सबसे बड़ी विशेषता होगी।
- पंचामृत लक्ष्य: 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन का लक्ष्य, लेकिन 2047 तक भारत अपनी 50% ऊर्जा जरूरतों को नवीकरणीय स्रोतों (सौर, पवन, हाइड्रोजन) से पूरा करेगा।
- ग्रीन हाइड्रोजन मिशन: भारत को ऊर्जा निर्यातक बनाने की दिशा में सबसे बड़ा कदम।
- लाइफ (LiFE) मिशन: पर्यावरण के अनुकूल जीवनशैली को वैश्विक आंदोलन बनाना।
अध्याय 6: राष्ट्रीय सुरक्षा और वैश्विक नेतृत्व (Vishwa Mitra)
विकसित भारत एक 'सशस्त्र और शांत' भारत होगा।
- रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता: तेजस, आईएनएस विक्रांत और ब्रह्मोस जैसे स्वदेशी हथियारों का निर्यात।
- अंतरिक्ष महाशक्ति: इसरो (ISRO) का गगनयान और चंद्रयान मिशन भारत को अंतरिक्ष पर्यटन और अनुसंधान का केंद्र बनाएगा।
- सॉफ्ट पावर: योग, आयुर्वेद और भारतीय संस्कृति के माध्यम से वैश्विक शांति का संदेश।
अध्याय 7: चुनौतियां और समाधान का मार्ग
- क्षेत्रीय असमानता: कुछ राज्यों का अधिक विकसित होना और कुछ का पिछड़ना। समाधान: 'एस्पिरेशनल डिस्ट्रिक्ट्स प्रोग्राम'।
- जलवायु परिवर्तन: प्राकृतिक आपदाओं से आर्थिक नुकसान। समाधान: आपदा प्रतिरोधी बुनियादी ढांचा (CDRI)।
- न्यायिक सुधार: न्याय में देरी विकास की बाधा है। समाधान: अदालतों का डिजिटलीकरण और कानूनी प्रक्रियाओं का सरलीकरण।
अध्याय 8: जन-भागीदारी (Sabka Prayas)
- विकसित भारत कोई सरकारी प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि एक 'जन आंदोलन' है।
- MyGov के माध्यम से करोड़ों भारतीयों के विचार इस विजन को आकार दे रहे हैं। हर छात्र, किसान, उद्यमी और पेशेवर को यह सोचना होगा कि उनका कार्य 2047 के भारत को कैसे प्रभावित करेगा।
केंद्रीय बजट 2026-27 में किए गए ऐसे प्रावधान जो विकसित भारत @2047 के लिए विशेष रूप से किए गए हैं:
यह बजट "सशक्त नागरिक, सक्षम राष्ट्र" की थीम पर आधारित है। इसके मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
1. आम आदमी और टैक्स
- टैक्स में राहत: मध्यम वर्ग के लिए ₹12 लाख तक की आय पर टैक्स छूट की सीमा को बरकरार रखा गया है।
- स्टैंडर्ड डिडक्शन (Standard Deduction): नौकरीपेशा लोगों के लिए स्टैंडर्ड डिडक्शन की सीमा बढ़ा दी गई है, जिससे हाथ में आने वाली सैलरी (Take-home salary) में बढ़ोतरी होगी।
- सरल प्रक्रिया: इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) भरने के लिए एआई (AI) आधारित नया सिस्टम शुरू किया गया है, जिससे कागजी कार्रवाई खत्म होगी और रिफंड जल्दी मिलेगा।
2. खेती और किसान (Agriculture)
- डिजिटल खेती (Digital Agri-Stack): हर किसान को एक 'डिजिटल पहचान पत्र' (Agri-ID) दिया जा रहा है। इससे खाद, बीज और सरकारी योजनाओं का पैसा सीधे और बिना किसी देरी के खाते में आएगा।
- भंडारण योजना: गांवों में अनाज रखने के लिए दुनिया की सबसे बड़ी गोदाम चेन बनाई जा रही है, ताकि फसल खराब न हो और किसान उसे सही दाम मिलने पर बेच सकें।
- प्राकृतिक खेती: 1 करोड़ और किसानों को 'कैमिकल-मुक्त' खेती से जोड़ने के लिए विशेष आर्थिक मदद का एलान किया गया है।
3. युवाओं के लिए रोजगार और हुनर (Employment & Skills)
- इंटर्नशिप प्रोग्राम 2.0: देश की बड़ी कंपनियों में 1 करोड़ युवाओं को काम सीखने (Internship) का मौका दिया जा रहा है। सीखने के दौरान उन्हें हर महीने भत्ता (Stipend) मिलेगा, जिसका आधा हिस्सा सरकार देगी।
- सस्ता एजुकेशन लोन: उच्च शिक्षा और टेक्निकल कोर्स के लिए बहुत कम ब्याज दर पर 'कौशल ऋण' (Skill Loans) की सुविधा दी गई है।
- स्टार्टअप को बढ़ावा: अपना काम शुरू करने वाले युवाओं के लिए 'एंजेल टैक्स' को पूरी तरह खत्म कर दिया गया है ताकि उन्हें निवेश आसानी से मिले।
4. बुनियादी ढांचा (Infrastructure)
- अमृत भारत स्टेशन: 1000 से ज्यादा रेलवे स्टेशनों को आधुनिक हवाई अड्डों की तरह चमकाया जाएगा।
- इलेक्ट्रिक गाड़ियाँ (EV): प्रदूषण कम करने के लिए नेशनल हाईवे पर हर 25 किलोमीटर पर चार्जिंग स्टेशन बनाने का लक्ष्य रखा गया है।
- सस्ती हवाई यात्रा: 'उड़ान' (UDAN) योजना के तहत छोटे शहरों में 50 नए हवाई अड्डे और हेलीपैड विकसित किए जाएंगे।
5. महिलाओं का सशक्तिकरण
- लखपति दीदी योजना: स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी 3 करोड़ महिलाओं को 'लखपति दीदी' बनाने के लिए कौशल प्रशिक्षण और बाजार उपलब्ध कराया जाएगा।
- महिला हॉस्टल: कामकाजी महिलाओं के लिए बड़े शहरों में सुरक्षित हॉस्टल और बच्चों के लिए 'क्रेच' (पालना घर) बनाने के लिए विशेष बजट दिया गया है।
6. बिहार के लिए विशेष प्रावधान
- बाढ़ से सुरक्षा: कोसी और अन्य नदियों की बाढ़ रोकने के लिए जल प्रबंधन की बड़ी योजनाओं को मंजूरी दी गई है।
- औद्योगिक गलियारा (Industrial Corridor): गया में एक बड़ा औद्योगिक हब बनाया जा रहा है, जिससे बिहार के युवाओं को राज्य में ही फैक्ट्रियों में काम मिल सके।
- पर्यटन: राजगीर, बोधगया और वैशाली को 'विश्व स्तरीय पर्यटन स्थल' बनाने के लिए बुनियादी ढांचे में भारी निवेश किया जाएगा।
7. तकनीक और भविष्य (Technology)
- एआई मिशन (AI Mission): भारत को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का ग्लोबल हब बनाने के लिए नए सेंटर खोले जाएंगे।
- सस्ता इंटरनेट: गांवों में 5G और भविष्य की 6G तकनीक पहुँचाने के लिए 'भारत नेट' योजना का विस्तार किया गया है।
बिहार बजट 2026-27 में किए गए ऐसे प्रावधान जो विकसित भारत @2047 के लिए विशेष रूप से किए गए हैं:
1. युवाओं के लिए रोजगार और उद्यमिता (Jobs & Startups)
- रोजगार सृजन: बजट में अगले एक साल के भीतर विभिन्न सरकारी विभागों में रिक्त पदों को भरने और नए पदों के सृजन के लिए विशेष फंड रखा गया है।
- स्टार्टअप बिहार: राज्य के युवाओं को अपना बिजनेस शुरू करने के लिए 'सीड फंड' (शुरुआती मदद) की राशि बढ़ा दी गई है। अब बिना ब्याज के लोन मिलना और आसान होगा।
- आईटी हब: पटना के पास और बिहटा जैसे इलाकों में नए आईटी पार्क्स के निर्माण के लिए बजट दिया गया है ताकि युवाओं को बाहर न जाना पड़े।
2. कृषि और ग्रामीण विकास (Agriculture & Rural Development)
- कृषि रोडमैप 4.0: चौथे कृषि रोडमैप के तहत मखाना, आम और लीची के निर्यात (Export) के लिए विशेष 'प्रोसेसिंग यूनिट्स' लगाई जाएंगी।
- सिंचाई की सुविधा: 'हर खेत तक पानी' योजना के तहत नए नलकूपों और पुरानी नहरों के जीर्णोद्धार के लिए भारी निवेश का प्रावधान है।
- डिजिटल पंचायत: राज्य की सभी पंचायतों को हाई-स्पीड इंटरनेट से जोड़कर 'स्मार्ट विलेज' बनाने का लक्ष्य रखा गया है।
3. बुनियादी ढांचा और कनेक्टिविटी (Infrastructure)
- एक्सप्रेस-वे: बिहार के पहले एक्सप्रेस-वे (आमस-दरभंगा) और अन्य प्रस्तावित एक्सप्रेस-वे के काम में तेजी लाने के लिए बजट आवंटित किया गया है।
- पुल और सड़कें: ग्रामीण इलाकों को मुख्य सड़कों से जोड़ने के लिए 'मुख्यमंत्री ग्राम संपर्क योजना' का विस्तार किया गया है।
- मेट्रो और एयरपोर्ट: पटना मेट्रो के काम को समय पर पूरा करने और बिहटा व पूर्णिया एयरपोर्ट के विस्तार के लिए विशेष राशि दी गई है।
4. शिक्षा और स्वास्थ्य (Education & Health)
- नए मेडिकल कॉलेज: राज्य के उन जिलों में जहाँ मेडिकल कॉलेज नहीं हैं, वहां नए कॉलेज और अस्पताल खोलने का एलान किया गया है।
- डिजिटल क्लासरूम: सरकारी स्कूलों को स्मार्ट क्लासरूम और कंप्यूटर लैब से लैस करने के लिए बजट में बढ़ोत्तरी की गई है।
- अनुसंधान (Research): राज्य के विश्वविद्यालयों में रिसर्च को बढ़ावा देने के लिए अलग से 'रिसर्च ग्रांट' की व्यवस्था की गई है।
5. महिला सशक्तिकरण और कल्याण (Women Welfare)
- जीविका दीदी: जीविका समूहों को अब बैंकिंग कॉरेस्पोंडेंट और छोटे उद्योगों (जैसे सोलर लाइट असेंबली) से जोड़ा जा रहा है।
- कन्या उत्थान योजना: उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाली छात्राओं को दी जाने वाली प्रोत्साहन राशि के लिए पर्याप्त फंड सुरक्षित रखा गया है।
6. पर्यटन और संस्कृति (Tourism & Culture)
- विरासत विकास: राजगीर, बोधगया, वैशाली और सासाराम जैसे ऐतिहासिक केंद्रों को 'विश्व स्तरीय पर्यटन हब' बनाने के लिए सड़कों और होटलों का जाल बिछाया जाएगा।
- गंगा रिवर फ्रंट: पटना की तर्ज पर अन्य नदी किनारे बसे शहरों में 'रिवर फ्रंट' विकसित करने की योजना है।
7. आपदा प्रबंधन (Disaster Management)
- बाढ़ नियंत्रण: उत्तर बिहार में बाढ़ की समस्या के स्थायी समाधान के लिए नदियों को जोड़ने और तटबंधों को मजबूत करने के लिए नेपाल सीमा के पास नई परियोजनाओं पर काम शुरू होगा।
निष्कर्ष
विकसित भारत 2047 का अर्थ केवल सड़कों और इमारतों का चमकना नहीं है, बल्कि हर भारतीय के चेहरे पर मुस्कान और आत्मसम्मान होना है। यह एक ऐसे भारत का सपना है जहाँ गरीबी इतिहास की बात होगी, जहाँ तकनीक मानवता की सेवा करेगी और जहाँ भारत एक 'विश्व मित्र' के रूप में पूरी दुनिया का नेतृत्व करेगा।
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भूमिका
भारतीय उपमहाद्वीप की सभ्यताओं की जब बात होती है, तो अक्सर सिंधु घाटी (हड़प्पा), गंगा घाटी, और वैदिक सभ्यता जैसे नाम ही मुख्यधारा में आते हैं। परंतु दक्षिण भारत, विशेषतः तमिलनाडु के गर्भ में भी एक अत्यंत प्राचीन और उन्नत सभ्यता समाहित थी, जिसे आज हम "केलाड़ी सभ्यता" (Keeladi Civilization) के नाम से जानते हैं। यह खोज न केवल भारतीय पुरातत्त्व के इतिहास को बदल देने वाली है, बल्कि यह द्रविड़ सभ्यता की निरंतरता और गौरवशाली विरासत को भी सामने लाती है।
केलाड़ी कहाँ है?
केलाड़ी गाँव तमिलनाडु राज्य के शिवगंगा जिले में स्थित है। यह स्थान मदुरै शहर से लगभग 12 किलोमीटर दूर, वैगई नदी के किनारे बसा हुआ है। यही नदी केलाड़ी सभ्यता की जीवनरेखा मानी जा सकती है।
उत्खनन की शुरुआत और प्रगति
वर्ष 2015 में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने पहली बार यहाँ खुदाई की।
प्रारंभिक खोजों से उत्साहित होकर तमिलनाडु पुरातत्व विभाग ने 2017 से खुदाई को और अधिक व्यापक रूप में आगे बढ़ाया।
अब तक 9 चरणों में खुदाई पूरी हो चुकी है (2024 तक)।
इन खुदाइयों ने चौंकाने वाले तथ्य सामने रखे, जिनसे पता चलता है कि दक्षिण भारत में 2600 साल पहले भी एक उन्नत शहरी सभ्यता विद्यमान थी।
केलाड़ी में प्राप्त प्रमुख पुरावशेष
1. निर्माण और स्थापत्य
ईंटों से बने मकानों के अवशेष मिले हैं जो दर्शाते हैं कि यहाँ पक्के घर बनाए जाते थे।
जल निकासी नालियाँ, कुएँ और पक्की सड़कें भी मिली हैं।
2. मिट्टी के बर्तन
लाल और काले रंग के सुंदर डिज़ाइन वाले बर्तन प्राप्त हुए हैं।
कुछ बर्तनों पर तमिल ब्राह्मी लिपि में शिलालेख भी खुदे हुए मिले हैं।
3. जीवनशैली और हस्तशिल्प
मनके (beads), कंघियाँ, सुइयाँ, और खिलौनों जैसे घरेलू उपयोग की वस्तुएँ मिली हैं।
लौह औज़ार जैसे हंसिया, चाकू, और काटने वाले यंत्र – कृषि और निर्माण के लिए।
4. व्यापार के प्रमाण
टेराकोटा की मुहरें और सिक्के दर्शाते हैं कि यह एक व्यापारिक केंद्र रहा होगा।
5. लिपि और लेखन
जो सबसे महत्वपूर्ण खोज रही वह है – तमिल ब्राह्मी लिपि में शिलालेख। यह दर्शाता है कि यहाँ लिखने-पढ़ने की परंपरा थी और समाज शिक्षित था।
काल निर्धारण (Dating of Civilization)
रेडियो कार्बन डेटिंग (Carbon Dating) और वैज्ञानिक विश्लेषणों से यह सिद्ध हुआ है कि:
केलाड़ी सभ्यता 600 ईसा पूर्व के आसपास विकसित हुई थी।
यानी यह समय संगम युग से पहले का है।
यह इस बात का संकेत है कि दक्षिण भारत में सिंधु घाटी सभ्यता के पतन के बाद भी एक निरंतर सभ्यता का विकास हुआ था।
केलाड़ी का ऐतिहासिक महत्व
1. द्रविड़ संस्कृति की पुष्टि
केलाड़ी के अवशेष बताते हैं कि दक्षिण भारत में द्रविड़ भाषी लोग (विशेषतः तमिल समाज) एक स्वतंत्र शहरी सभ्यता चला रहे थे। यह उस धारणा को चुनौती देता है कि भारत की प्राचीनता केवल उत्तर भारत तक सीमित थी।
2. संगम साहित्य को भौतिक आधार
संगम साहित्य में वर्णित नगर, समाज और संस्कृति अब केवल साहित्यिक कल्पना नहीं रह गए हैं – उनके भौतिक प्रमाण भी केलाड़ी से मिले हैं।
3. लिपि का विकास
तमिल ब्राह्मी लिपि के साक्ष्य यह सिद्ध करते हैं कि दक्षिण भारत में 6वीं सदी ई.पू. में ही लेखन की परंपरा विद्यमान थी।
संरक्षण और संग्रहालय
- तमिलनाडु सरकार ने केलाड़ी में विशाल संग्रहालय की स्थापना की है (2023 में उद्घाटन)।
- खुदाई स्थल को पर्यटक स्थल के रूप में विकसित किया जा रहा है।
- राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर केलाड़ी की पहचान बढ़ रही है।
- केलाड़ी से जुड़े कुछ तथ्य (Prelims/MCQ के लिए उपयोगी)
- केलाड़ी गाँव तमिलनाडु के शिवगंगा जिले में स्थित है।
- यह वैगई नदी के तट पर स्थित है।
- यहाँ से तमिल ब्राह्मी लिपि के लेख मिले हैं।
- सभ्यता का काल निर्धारण लगभग 600 ईसा पूर्व किया गया है।
- इसे "दक्षिण भारत की हड़प्पा" के नाम से जाना जाता है।
निष्कर्ष
केलाड़ी महज एक खुदाई नहीं, एक क्रांति है – इतिहास दृष्टि की क्रांति। यह खोज यह बताती है कि दक्षिण भारत की संस्कृति, शहरीकरण और साक्षरता उतनी ही पुरानी और समृद्ध है जितनी उत्तर भारत की। द्रविड़ सभ्यता केवल मिथक नहीं, बल्कि भौतिक प्रमाणों से सजीव इतिहास है। आज की पीढ़ी के लिए यह आवश्यक है कि वे इस गौरवशाली विरासत को जानें, समझें और आगे बढ़ाएं।
भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में कुछ ऐसे महानायक हुए हैं, जिन्होंने केवल अपने प्राणों का बलिदान ही नहीं दिया, बल्कि अपनी लेखनी को भी राष्ट्र के लिए हथियार बना दिया। उनके बोले गए शब्द, लिखी हुई पंक्तियाँ और किया गया प्रत्येक कार्य स्वतंत्रता का प्रतीक बन गया। ऐसे ही महान क्रांतिकारी थे—पंडित रामप्रसाद बिस्मिल।

11 जून 1897 को उत्तर प्रदेश के शाहजहाँपुर में मुरलीधर और मूलमती के पुत्र के रूप में जन्मे बिस्मिल साधारण परिवार से थे, लेकिन उनके विचार असाधारण थे। कहा जाता है कि उनका पैतृक गाँव मैनपुरी के निकट मुरैनावां (बरवाँई) था। उनकी जन्मकुंडली और हाथों की सभी उंगलियों में चक्र के चिन्ह देखकर एक ज्योतिषी ने भविष्यवाणी की थी—"यदि यह बालक जीवित रहा, तो इसे चक्रवर्ती सम्राट बनने से कोई नहीं रोक सकता।"
बचपन से ही बिस्मिल में राष्ट्रभक्ति के संस्कार गहरे थे। प्रारंभिक शिक्षा घर पर ही हुई। जब वे कक्षा 9 में थे, तब वे आर्य समाज और स्वामी दयानंद सरस्वती के विचारों से प्रभावित हुए। किशोर अवस्था में ही उन्होंने ब्रिटिश शासन की क्रूरता को देखा और अनुभव किया, जिससे उनका मन स्वतंत्रता संग्राम की ओर झुक गया।
उन्होंने अपने क्रांतिकारी जीवन में 'बिस्मिल' उपनाम अपनाया, जिसका अर्थ होता है—"आत्मिक रूप से व्यथित"। यह नाम उनकी वेदना और देशभक्ति का प्रतीक बन गया।
क्रांति और कलम का संगम
रामप्रसाद बिस्मिल न केवल एक योद्धा थे, बल्कि एक संवेदनशील लेखक और कवि भी थे। उन्होंने बंगाल के क्रांतिकारी शचीन्द्रनाथ सान्याल और जादूगोपाल मुखर्जी के साथ मिलकर हिन्दुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन (HRA) की स्थापना की। इस संगठन का उद्देश्य भारत को ब्रिटिश दासता से मुक्त कराना था।
बिस्मिल अपनी देशभक्त माता से पैसे उधार लेकर किताबें लिखते और प्रकाशित करते थे। उनके द्वारा लिखी गई रचनाएँ जैसे—‘देशवासियों के नाम’, ‘स्वदेशी रंग’, ‘मन की लहर’, और ‘स्वाधीनता की देवी’—उनके विचारों का सशक्त प्रमाण हैं। इन पुस्तकों की बिक्री से जो धन प्राप्त होता, उससे वे हथियार खरीदते थे। उन्होंने ‘बिस्मिल’, ‘राम’ और ‘अज्ञात’ नामों से कई रचनाएँ कीं।
काकोरी कांड: साहस की पराकाष्ठा
बिस्मिल का सबसे प्रसिद्ध कार्य 1925 का काकोरी कांड था, जिसमें उन्होंने चंद्रशेखर आजाद, अशफाकउल्ला खान और अन्य साथियों के साथ मिलकर अंग्रेजी खजाने को लूटने की योजना बनाई। इसका उद्देश्य था—ब्रिटिश शासन के विरुद्ध हथियार जुटाना और क्रांतिकारी गतिविधियों को संगठित करना।
यह घटना ब्रिटिश सरकार की चूलें हिला गई। कुछ ही समय में बिस्मिल समेत 30 से अधिक क्रांतिकारियों को गिरफ्तार कर लिया गया। बिस्मिल, अशफाकउल्ला खान, राजेंद्रनाथ लाहिड़ी और रोशन सिंह को फाँसी की सज़ा सुनाई गई।
साहित्यिक योगदान और आत्मकथा
लखनऊ सेंट्रल जेल में रहते हुए बिस्मिल ने अपनी आत्मकथा लिखी, जिसे स्वतंत्रता संग्राम के प्रसिद्ध पत्रकार गणेश शंकर विद्यार्थी ने 1928 में प्रकाशित किया। बिस्मिल की यह आत्मकथा न केवल क्रांति का दस्तावेज है, बल्कि युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत भी है।
अपने जेल जीवन के दौरान ही उन्होंने प्रसिद्ध गीत "मेरा रंग दे बसंती चोला" की रचना की, जो आज भी देशभक्ति का प्रतीक माना जाता है।
अंतिम समय की अमर वाणी
19 दिसंबर 1927 को गोरखपुर जेल में जब बिस्मिल को फाँसी देने से पहले उनकी अंतिम इच्छा पूछी गई, तो उन्होंने केवल यही कहा—
"अंग्रेजी शासन का सर्वनाश हो।"
वे चले गए, लेकिन उनके विचार, लेखनी और बलिदान आज भी जीवित हैं।
उनकी स्मृति मात्र से ही मन देशभक्ति से भर उठता है।
नमन है उस 'बिस्मिल' को—
"सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है,
देखना है ज़ोर कितना बाजुए क़ातिल में है..."
उनके जैसे क्रांतिकारियों की शहादत से ही यह देश स्वतंत्र हुआ, और आने वाली पीढ़ियाँ सदैव उनके ऋणी रहेंगी।
भूमिका
बिहार एक नदीप्रधान राज्य है, जहाँ गंगा, कोसी, गंडक, सोन और अन्य अनेक नदियाँ राज्य की भूगोलिक और आर्थिक संरचना को प्रभावित करती हैं। इन नदियों पर बने पुल केवल एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचने का साधन नहीं हैं, बल्कि ग्रामीण-शहरी संपर्क, व्यापार, आपूर्ति श्रृंखला, और आपदा प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण पक्षों के लिए अनिवार्य अवसंरचना हैं। बीते वर्षों में पुलों के बार-बार गिरने की घटनाओं ने न केवल जान-माल का नुकसान किया बल्कि सरकार की छवि और विकास के भरोसे को भी ठेस पहुँचाई है।
नीति की आवश्यकता क्यों पड़ी? (गहराई से विश्लेषण)
- संरचनात्मक जर्जरता:
बिहार के 4000 के करीब पुलों में से बड़ी संख्या में पुल दशकों पुराने हैं। कई पुलों के निर्माण के समय मौजूदा ट्रैफिक लोड की कल्पना भी नहीं की गई थी। - नवीन चुनौतियाँ:
जलवायु परिवर्तन के चलते बढ़ते बाढ़, भारी बारिश और अधिक तापमान जैसी घटनाओं ने पुलों पर अतिरिक्त दबाव डाला है। - प्रबंधन में खामी:
निरीक्षण, मरम्मत और डेटा संकलन की कोई केंद्रीकृत और नियमित व्यवस्था न होने से नीति निर्माण और संकट प्रबंधन में देरी होती है।
नीति के प्रमुख स्तंभ
1. ब्रिज हेल्थ कार्ड प्रणाली (Bridge Health Card)
- प्रत्येक पुल का यूनीक डिजिटल प्रोफाइल तैयार होगा जिसमें निम्न जानकारी होगी:
- निर्माण तिथि
- निर्माण सामग्री
- निरीक्षण की तिथियाँ
- पाए गए दोष
- मरम्मत की रिपोर्ट
- भार सहन क्षमता
- यह कार्ड GIS-सक्षम एप्लीकेशन में समाहित होगा जिससे प्रशासन, अभियंता और आपदा प्रबंधन एजेंसियाँ एक क्लिक पर पुल की जानकारी प्राप्त कर सकें।
2. नियमित निरीक्षण और थर्ड-पार्टी ऑडिट
- मासिक निरीक्षण अनिवार्य होगा, विशेषकर वर्षा ऋतु और बाढ़ के बाद।
- थर्ड-पार्टी ऑडिट से निष्पक्षता सुनिश्चित होगी। इसके लिए सरकार इंजीनियरिंग कॉलेजों, एनएबीएल-प्रमाणित संस्थानों और निजी विशेषज्ञ एजेंसियों से अनुबंध करेगी।
3. विशेषज्ञ संस्थानों की भागीदारी और प्रशिक्षण
- IITs और NITs जैसे संस्थानों से MoU कर वैज्ञानिक अध्ययन, तकनीकी मार्गदर्शन और समस्या समाधान कराया जाएगा।
- अभियंताओं के लिए Continuing Technical Education (CTE) कार्यक्रम होंगे ताकि वे संरचनात्मक मूल्यांकन की नवीनतम विधियों से परिचित रहें।
4. रियल-टाइम मॉनिटरिंग और IoT आधारित सेंसर नेटवर्क
- बड़े और रणनीतिक पुलों पर Structural Health Monitoring Systems (SHMS) लगाए जाएंगे जो कंपन, भार, आर्द्रता और तापमान का निरंतर विश्लेषण करेंगे।
- सेंसर से प्राप्त डेटा सीधे राज्य पुल नियंत्रण केंद्र (Bridge Command Center) को भेजा जाएगा।
5. जोखिम आधारित वर्गीकरण (Risk-Based Categorization)
- सभी पुलों को लो, मीडियम और हाई रिस्क श्रेणी में वर्गीकृत किया जाएगा।
- हाई रिस्क पुलों पर विशेष निगरानी और शीघ्र मरम्मत का प्रावधान होगा।
नीति से अपेक्षित लाभ (विस्तार से)
- संरचनात्मक स्थायित्व:
समय पर निरीक्षण और मरम्मत से पुलों की आयु बढ़ेगी और महंगे पुनर्निर्माण की आवश्यकता घटेगी। - दुर्घटना में कमी:
समय रहते दोष पता चलने से जान-माल की क्षति रोकी जा सकेगी। - प्रभावी यातायात:
पुल क्षतिग्रस्त होने के कारण परिवहन ठप होने की घटनाएँ कम होंगी, जिससे व्यापार और जनजीवन पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा। - राजकोषीय दक्षता:
अनावश्यक खर्चे और आपातकालीन मरम्मत की जगह योजनाबद्ध मेंटेनेंस से लागत कम आएगी। - आपदा प्रबंधन में मदद:
बाढ़ या भूकंप के समय किन पुलों से राहत सामग्री भेजी जा सकती है, इसका निर्णय डेटा के आधार पर तुरंत लिया जा सकेगा। - पारदर्शिता और उत्तरदायित्व:
हेल्थ कार्ड और थर्ड पार्टी ऑडिट से जवाबदेही तय होगी और भ्रष्टाचार में भी कमी आएगी।
क्रियान्वयन की चुनौतियाँ और समाधान
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चुनौती |
संभावित समाधान |
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बजट की कमी |
पुल रखरखाव हेतु एक पृथक “Bridge Maintenance Fund” बनाया जाए। |
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तकनीकी मानव संसाधन की कमी |
स्थानीय अभियंताओं को प्रशिक्षित कर जिला स्तरीय ब्रिज मॉनिटरिंग सेल बनाई जाए। |
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डेटा संग्रहण में एकरूपता की कमी |
統一 ब्रिज मैनेजमेंट सिस्टम (UBMS) सॉफ़्टवेयर लागू किया जाए। |
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राजनीतिक हस्तक्षेप और ठेकेदारी में भ्रष्टाचार |
थर्ड पार्टी ऑडिट को अनिवार्य कर और शिकायत निवारण तंत्र को मजबूत कर पारदर्शिता बढ़ाई जाए। |
निष्कर्ष
बिहार राज्य पुल प्रबंधन एवं मेंटेनेंस नीति 2025 राज्य के इंफ्रास्ट्रक्चर प्रबंधन को भविष्य के अनुरूप बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। यह नीति सतत विकास, आपदा पूर्व चेतावनी, और तकनीकी नवाचार को एकीकृत करती है। यदि इसका सही तरीके से पालन हुआ, तो यह बिहार को भारत में पुल संरचना प्रबंधन का मॉडल राज्य बना सकती है।


4 June 2025
2025 में आयोजित ‘नॉर-शिपिंग’ (Nor-Shipping) कार्यक्रम के दौरान भारत और नॉर्वे के बीच समुद्री क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग को लेकर महत्वपूर्ण वार्ता हुई। इस बैठक की अगुवाई भारत की ओर से केंद्रीय पोत परिवहन मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने की। इस द्विपक्षीय बातचीत ने दोनों देशों के बीच हरित समुद्री तकनीकों, सतत विकास, और ब्लू इकोनॉमी के क्षेत्र में सहयोग को नई दिशा दी।
मुख्य बिंदु: हरित समुद्री तकनीकों पर जोर
- दोनों पक्षों ने हरित जहाज निर्माण (Green Shipbuilding), इलेक्ट्रिक फेरी, स्मार्ट लॉजिस्टिक्स, और स्वच्छ तटीय परिवहन (clean coastal transport) पर सहयोग बढ़ाने की बात कही।
- यह कदम वैश्विक जलवायु परिवर्तन के परिप्रेक्ष्य में समुद्री परिवहन को कार्बन न्यूट्रल बनाने की दिशा में एक बड़ी पहल है।
Northern Sea Route (NSR) पर संयुक्त व्यवहार्यता अध्ययन
- भारत ने प्रस्ताव दिया कि दोनों देश नॉर्दर्न सी रूट (Northern Sea Route – NSR) के संचालन हेतु संयुक्त व्यवहार्यता अध्ययन करें।
- यह रूट, जो आर्कटिक महासागर के ज़रिए यूरोप और एशिया को जोड़ता है, ईंधन की बचत, कम यात्रा समय, और वैश्विक व्यापार में नए अवसरों को जन्म दे सकता है।
आर्कटिक नेविगेशन और बर्फीले जल में सहयोग
- चर्चा में आर्कटिक नेविगेशन, बर्फीले पानी में जहाज निर्माण, और आर्टिक में हरित तकनीक वाले जहाजों के संचालन पर विशेष बल दिया गया।
- भारत और नॉर्वे दोनों ही International Maritime Organization (IMO) के सदस्य हैं और समुद्री सुरक्षा व नवाचार को लेकर साझेदारी कर सकते हैं।
जहाज पुनर्चक्रण और अलंग का महत्व
- नॉर्वे ने भारत के गुजरात स्थित अलंग शिप रीसाइक्लिंग यार्ड को जहाज पुनर्चक्रण के क्षेत्र में वैश्विक केंद्र के रूप में देखा है।
- सतत मछलीपालन, महासागरीय अक्षय ऊर्जा (जैसे – पवन और ज्वारीय ऊर्जा), और समुद्री संसाधनों के टिकाऊ उपयोग में भी दोनों देशों ने सहयोग बढ़ाने की सहमति दी।
‘सागर में सम्मान’ और लैंगिक समानता
- भारत ने अपनी पहल ‘सागर में सम्मान’ के तहत समुद्री क्षेत्र में लैंगिक समानता बढ़ाने के प्रयासों की जानकारी साझा की।
- इसमें महिलाओं के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम, नौकरी के अवसर, और नेतृत्व विकास पर बल दिया गया।
- भारत ने नॉर्वे को इन परियोजनाओं में भाग लेने का आमंत्रण भी दिया।
समुद्री नवीकरणीय ऊर्जा: महासागरीय पवन व ज्वारीय ऊर्जा
- भारत ने नॉर्वे को महासागरीय पवन (Ocean Wind) और ज्वारीय ऊर्जा (Tidal Energy) में संयुक्त अनुसंधान व विकास परियोजनाओं के लिए आमंत्रित किया।
- नॉर्वे की तकनीकी विशेषज्ञता और भारत की संसाधन क्षमता इस क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व प्रदान कर सकती है।
ब्लू इकोनॉमी को सशक्त बनाने की दिशा में साझा लक्ष्य
- मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने इस साझेदारी को ब्लू इकोनॉमी (Blue Economy) को सशक्त बनाने के लिहाज़ से ऐतिहासिक अवसर बताया।
- उन्होंने कहा कि यह साझेदारी न केवल दोनों देशों को लाभ पहुंचाएगी, बल्कि वैश्विक समुद्री क्षेत्र को सतत और समावेशी विकास की ओर अग्रसर करेगी।
निष्कर्ष
भारत-नॉर्वे के बीच यह संवाद एक रणनीतिक समुद्री साझेदारी की ओर संकेत करता है। जहां एक ओर नॉर्वे की उच्च तकनीकी विशेषज्ञता है, वहीं भारत के पास विशाल समुद्री तटरेखा और विशाल मानव संसाधन क्षमता है। दोनों देशों के बीच यह सहयोग हरित प्रौद्योगिकी, अक्षय ऊर्जा, लैंगिक समानता, और सतत विकास लक्ष्यों की पूर्ति में मील का पत्थर सिद्ध हो सकता है।
राज्य सरकार न्याय के साथ विकास का नजरिया रखते हुए सभी लोगों, क्षेत्रों और वर्गों को साथ लेकर चलने के लिए कृत संकल्पित है। बिहार में विकास की रणनीति समावेशी, न्यायोचित और सतत् होने के साथ-साथ आर्थिक प्रगति पर आधारित है। बिहार को देश के विकसित राज्यों की श्रेणी में लाने के लिए सुशासन के कार्यक्रम को पूरे राज्य में लागू किया जा रहा है। सुशासन के तहत सरकार ने सभी नागरिकों को मूलभूत सुविधाएँ जैसे पेयजल, शौचालय, और बिजली उपलब्ध कराने के साथ-साथ आधारभूत संरचनाओं जैसे सड़क, गली-नाली, और पुलों के विस्तार पर विशेष ध्यान दिया है। इसके अतिरिक्त, युवाओं और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने तथा उनके लिए उच्च व्यावसायिक और तकनीकी शिक्षा की व्यवस्था करने पर बल दिया जा रहा है। इन सभी बिंदुओं को समाहित करते हुए सरकार ने विकसित बिहार के सात निश्चय पार्ट-1 (2015-2020) और सात निश्चय पार्ट-2 (2020-2025) की रूपरेखा तैयार की और उन्हें सुशासन के कार्यक्रम में शामिल किया। इन योजनाओं को सार्वभौमिक स्वरूप दिया गया है, जिससे सभी क्षेत्रों, समुदायों और वर्गों को बिना किसी भेदभाव के लाभ प्राप्त हो रहा है।
राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता विधि-व्यवस्था को सुदृढ़ करते हुए कानून का शासन स्थापित करना और नागरिकों को भयमुक्त समाज प्रदान करना है। संगठित अपराध पर कड़ाई से अंकुष लगाया गया है, और कानूनी प्रावधानों का पालन सुनिश्चित करते हुए अपराध नियंत्रण की ठोस व्यवस्था लागू की गई है। पुलिस तंत्र को और सशक्त बनाने के लिए आधुनिक तकनीकों और प्रशिक्षण का उपयोग किया जा रहा है, ताकि वे अपने दायित्वों का कुशलतापूर्वक निर्वहन कर सकें। सरकार के इस संकल्प का परिणाम है कि बिहार में सामाजिक सौहार्द और सांप्रदायिक सद्भाव का वातावरण कायम है।
राष्ट्रीय अपराध अभिलेख ब्यूरो (NCRB) के 2024 के नवीनतम आँकड़ों के अनुसार, बिहार में प्रति लाख जनसंख्या पर दर्ज संज्ञेय अपराधों की दर 150.2 है, जो राष्ट्रीय औसत 230.8 से काफी कम है। अपराध दर के आधार पर बिहार का स्थान राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 24वाँ है। वर्ष 2024 में दर्ज अपराधों के अधिकांश मामलों में उद्भेदन (केस सॉल्विंग) किया गया है, और कानूनी प्रक्रिया पूरी कर कई अभियुक्तों को सजा भी दी गई है।
पुलिस बल की संख्या को राष्ट्रीय मानक तक पहुँचाने के लिए 2024 में 150 पुलिस उपाधीक्षकों, 300 पुलिस अवर निरीक्षकों, और 12,000 सिपाहियों की नियुक्ति की गई। थाना स्तर पर विधि-व्यवस्था और अनुसंधान शाखाओं को अलग करने के लिए 6,000 पुलिस अवर निरीक्षक और 3,000 सहायक अवर निरीक्षक के पद सृजित किए गए हैं। इन कदमों से पुलिस कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और दक्षता बढ़ी है।
भ्रष्टाचार के खिलाफ सरकार की नीति जीरो टॉलरेंस की रही है। निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने 2024 में 65 रिश्वतखोरी, 3 आय से अधिक संपत्ति, और 5 पद के दुरुपयोग से संबंधित मामलों सहित कुल 73 कांड दर्ज किए। सात मामलों में लोक सेवकों की चल-अचल संपत्ति जब्त की गई। आर्थिक अपराध इकाई ने 50 आय से अधिक संपत्ति के मामले दर्ज किए, जिनमें 35 में आरोप पत्र दाखिल किए गए। बिहार विशेष न्यायालय अधिनियम के तहत 30 मामलों में संपत्ति जब्ती की कार्रवाई चल रही है। प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत 150 मामलों में 300 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति जब्ती का प्रस्ताव प्रवर्तन निदेशालय को भेजा गया है।
प्रशासनिक और वित्तीय संरचनाओं को सुदृढ़ और पारदर्शी बनाने के साथ-साथ नागरिकों को कानूनी अधिकार प्रदान कर सशक्त बनाने पर ध्यान केंद्रित किया गया है। बिहार लोक शिकायत निवारण अधिकार अधिनियम, 2015 के तहत नागरिकों को उनकी शिकायतों पर सुनवाई और समयबद्ध निवारण का अधिकार दिया गया है। 2025 तक, 6 लाख से अधिक शिकायतों का निपटारा किया गया है, जिससे जनता में विश्वास बढ़ा है। इस अधिनियम को 2024 में स्कॉच अवार्ड फॉर गुड गवर्नेंस और कॉमनवेल्थ एसोसिएशन ऑफ पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन एंड मैनेजमेंट के सिटीजन फोकस्ड इनोवेशन श्रेणी में सर्टिफिकेट ऑफ डिस्टिंक्शन से सम्मानित किया गया। लोक संवाद के माध्यम से नागरिकों से प्राप्त सुझावों के आधार पर नीतियों और योजनाओं को और बेहतर किया जा रहा है।
आधारभूत संरचना के विकास और कल्याणकारी योजनाओं के लिए 2024-25 का राज्य बजट 2.12 लाख करोड़ रुपये है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 20% अधिक है। कर राजस्व संग्रहण 2023-24 में 35,000 करोड़ रुपये था, और 2024-25 में 42,000 करोड़ रुपये होने का अनुमान है। राजस्व बचत 25,000 करोड़ रुपये और राजकोषीय घाटा 13,000 करोड़ रुपये (राज्य GDP का 2.5%) अनुमानित है, जो बिहार राज्यकोषीय उत्तरदायित्व एवं बजट प्रबंधन अधिनियम की 3% सीमा के अंतर्गत है।
केंद्रीय सांख्यिकी संगठन के अनुसार, 2023-24 में बिहार की आर्थिक विकास दर 10.8% रही, जो राष्ट्रीय औसत 7.5% से अधिक है। यह दर देश के शीर्ष राज्यों में शामिल है। समेकित वित्तीय प्रबंधन प्रणाली, जो अप्रैल 2019 से लागू है, 2025 तक पूर्णतः डिजिटल हो चुकी है, जिससे वित्तीय कार्य और कोषागार प्रणाली पारदर्शी और कुशल बनी है।
महिला सशक्तीकरण के लिए पंचायती राज और नगर निकायों में 50% आरक्षण, पुलिस भर्ती में 35% आरक्षण, और सभी सरकारी नौकरियों में 35% आरक्षण लागू किया गया है। जीविका कार्यक्रम के तहत 2025 तक 10 लाख स्वयं सहायता समूह बनाए गए, जिनसे 1.2 करोड़ परिवार जुड़े हैं। मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना के तहत कन्या जन्म पर 2,000 रुपये, आधार पंजीयन पर 1,000 रुपये, और टीकाकरण पर 2,000 रुपये दिए जाते हैं। 12वीं उत्तीर्ण बालिकाओं को 15,000 रुपये और स्नातक उत्तीर्ण बालिकाओं को 50,000 रुपये प्रदान किए जा रहे हैं। साइकिल योजना की राशि 4,000 रुपये और पोशाक योजना की राशि बढ़ाई गई है। 2024-25 में 2 लाख से अधिक बालिकाओं को लाभ मिला है।
सात निश्चय पार्ट-1 और पार्ट-2 के तहत योजनाओं का मिशन मोड में क्रियान्वयन बिहार विकास मिशन द्वारा किया जा रहा है। कृषि रोडमैप, शिक्षा, और स्वास्थ्य योजनाओं की प्रगति की निगरानी की जा रही है। बिहार स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना में युवाओं को 4% साधारण ब्याज पर 4 लाख रुपये तक का ऋण, और महिलाओं, दिव्यांगों, ट्रांसजेंडरों को 1% ब्याज पर ऋण दिया जा रहा है। 2025 तक 5 लाख युवाओं को लाभ मिला है। मुख्यमंत्री निश्चय स्वयं सहायता भत्ता योजना के तहत 3.5 लाख युवाओं को 300 करोड़ रुपये दिए गए। कुशल युवा कार्यक्रम के तहत 2,000 प्रशिक्षण केंद्रों में भाषा, संवाद, और कंप्यूटर कौशल प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है।
350 से अधिक सरकारी संस्थानों में निःशुल्क वाई-फाई सुविधा उपलब्ध है। स्टार्ट-अप नीति 2017 के तहत 700 करोड़ रुपये का वेंचर कैपिटल फंड बनाया गया, और 1,500 स्टार्ट-अप्स को इन्क्यूबेशन के लिए जोड़ा गया। हर घर बिजली योजना के तहत 2018 में ही 1.19 करोड़ घरों को कवर किया गया, और 2025 तक 100% विद्युतीकरण सुनिश्चित हुआ। मुख्यमंत्री कृषि विद्युत संबंध योजना से किसानों को मुफ्त बिजली कनेक्शन दिए जा रहे हैं।
हर घर नल का जल योजना के तहत 2025 तक ग्रामीण क्षेत्रों में 40,000 वार्डों में कार्य शुरू हुआ, जिनमें 30,000 पूर्ण हुए, और 25 लाख घर कवर किए गए। लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग ने 6,000 गैर-गुणवत्ता प्रभावित वार्डों में कार्य शुरू किया, 2,500 पूर्ण किए, और 5 लाख घरों को कवर किया। 4,000 आर्सेनिक, 4,200 फ्लोराइड, और 12,000 लौह प्रभावित वार्डों के लिए योजनाएँ स्वीकृत हैं। मिनी पाइप जलापूर्ति योजना में 5,500 वार्डों में कार्य शुरू हुआ, 1,200 पूर्ण हुए, और 2 लाख घर कवर किए गए। शहरी क्षेत्रों में 3,000 वार्डों में कार्य शुरू हुआ, और 8 लाख घरों को नल का जल मिला।
भूमिका
भारतीय लोकतंत्र की नींव विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच संतुलन पर टिकी है। यह संतुलन संविधान की आत्मा है, जो तीनों स्तंभों को परस्पर सहयोग और नियंत्रण के साथ कार्य करने का दायित्व देता है। हाल के दशकों में, सर्वोच्च न्यायालय के कुछ ऐतिहासिक फैसलों ने यह सवाल उठाया है कि क्या वह संसद से ऊपर हो गया है, या वह केवल संविधान की रक्षा कर रहा है। इसे 'सुपर संसद' कहने की बहस तब और तेज होती है, जब न्यायपालिका संसद के बनाए कानूनों को रद्द करती है या सरकार की नीतियों में हस्तक्षेप करती है। यह लेख इस प्रश्न का विश्लेषण करता है कि क्या सर्वोच्च न्यायालय वास्तव में 'सुपर संसद' है, या वह संवैधानिक सीमाओं में रहकर लोकतंत्र की रक्षा करता है।
न्यायपालिका को 'सुपर संसद' क्यों कहा जाता है?
सर्वोच्च न्यायालय की शक्तियाँ और भूमिका इसे संसद से अलग और कुछ मामलों में उससे ऊपर की स्थिति प्रदान करती हैं। निम्नलिखित बिंदु इसे स्पष्ट करते हैं:
1. संविधान की सर्वोच्च व्याख्याता:
भारतीय संविधान की व्याख्या का अंतिम अधिकार सर्वोच्च न्यायालय के पास है। अनुच्छेद 141 के तहत इसके निर्णय देश भर में बाध्यकारी हैं। इसका अर्थ है कि संसद द्वारा बनाया गया कोई भी कानून, यदि संविधान के विपरीत हो, तो न्यायालय उसे असंवैधानिक घोषित कर सकता है। यह शक्ति न्यायपालिका को संसद के ऊपर एक निगरानी की भूमिका देती है। उदाहरण के लिए, केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य (1973) में न्यायालय ने 'मूल ढांचा सिद्धांत' (Basic Structure Doctrine) प्रतिपादित किया, जिसके तहत संसद संविधान के मूल ढांचे को नहीं बदल सकती। इसने संसद की संशोधन शक्ति पर एक स्पष्ट सीमा तय की।
2. न्यायिक पुनरावलोकन (Judicial Review):
न्यायपालिका को संसद के कानूनों और संशोधनों की संवैधानिकता की जांच करने का अधिकार है। यदि कोई कानून मौलिक अधिकारों या संविधान के अन्य प्रावधानों का उल्लंघन करता है, तो उसे रद्द किया जा सकता है। कुछ महत्वपूर्ण उदाहरण:
- मिनर्वा मिल्स बनाम भारत सरकार (1980): संसद द्वारा किए गए संशोधन को रद्द करते हुए न्यायालय ने मौलिक अधिकारों की रक्षा की।
- गोलकनाथ बनाम पंजाब राज्य (1967): न्यायालय ने कहा कि संसद मौलिक अधिकारों में संशोधन नहीं कर सकती, हालाँकि यह बाद में 24वें संशोधन द्वारा संशोधित हुआ।
- इंदिरा गांधी बनाम राज नारायण (1975): संसद द्वारा किया गया एक संशोधन, जो प्रधानमंत्री के चुनाव को न्यायिक समीक्षा से बाहर करता था, रद्द कर दिया गया।
- चुनावी बॉन्ड मामला (2024): सर्वोच्च न्यायालय ने चुनावी बॉन्ड योजना को असंवैधानिक घोषित किया, क्योंकि यह सूचना के अधिकार (RTI) और पारदर्शिता का उल्लंघन करती थी।
3. मौलिक अधिकारों की रक्षा:
अनुच्छेद 32 और 226 के तहत, नागरिक अपने मौलिक अधिकारों के उल्लंघन की स्थिति में सीधे सर्वोच्च न्यायालय या उच्च न्यायालय जा सकते हैं। डॉ. बी.आर. आंबेडकर ने अनुच्छेद 32 को 'संविधान का हृदय और आत्मा' कहा। यह शक्ति न्यायपालिका को संसद और सरकार के कार्यों की निगरानी करने का अधिकार देती है। उदाहरण:
- शायरा बानो बनाम भारत सरकार (2017): तीन तलाक को असंवैधानिक घोषित कर मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों की रक्षा।
- नवतेज सिंह जोहर बनाम भारत सरकार (2018): धारा 377 को रद्द कर समलैंगिकता को अपराध की श्रेणी से हटाया।
- सबरीमाला मंदिर मामला (2018): मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर प्रतिबंध को असंवैधानिक घोषित कर लैंगिक समानता को बढ़ावा दिया।
4. जनहित याचिका (PIL):
1980 के दशक से, जनहित याचिकाओं ने न्यायपालिका को सामाजिक मुद्दों पर सक्रिय भूमिका निभाने का अवसर दिया। कोई भी नागरिक सामाजिक हित के लिए याचिका दायर कर सकता है, जिसके परिणामस्वरूप कई क्षेत्रों में सुधार हुए:
- पर्यावरण संरक्षण: दीपावली पर पटाखों पर प्रतिबंध, औद्योगिक अपशिष्ट प्रबंधन के दिशानिर्देश।
- बाल श्रम उन्मूलन: खतरनाक उद्योगों में बाल श्रम पर प्रतिबंध।
- पुलिस सुधार: पुलिस भर्ती, स्थानांतरण और स्वतंत्रता के लिए दिशानिर्देश।
- जेल सुधार: कैदियों के अधिकारों और जेलों की स्थिति में सुधार।
- भ्रष्टाचार विरोधी कदम: भ्रष्टाचार के मामलों में स्वतः संज्ञान और निष्पक्ष जांच के आदेश।
5. न्यायिक सक्रियता (Judicial Activism):
जब न्यायपालिका संविधान की रक्षा के लिए सरकार या संसद के कार्यों में हस्तक्षेप करती है, तो इसे न्यायिक सक्रियता कहते हैं। इसका उद्देश्य मौलिक अधिकारों की रक्षा, प्रशासन की निष्क्रियता को दूर करना और कानूनों का सही कार्यान्वयन सुनिश्चित करना है। उदाहरण:
- पटाखों पर प्रतिबंध: वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए दीपावली पर पटाखों की बिक्री और उपयोग पर रोक।
- सबरीमाला मंदिर: महिलाओं को समान धार्मिक अधिकार देने का फैसला।
- धारा 377 का निरस्तीकरण: समलैंगिक समुदाय के अधिकारों की रक्षा।
6. अनुच्छेद 142: पूर्ण न्याय की शक्ति:
अनुच्छेद 142 सर्वोच्च न्यायालय को 'पूर्ण न्याय' के लिए आवश्यक आदेश पारित करने की शक्ति देता है। यह शक्ति इसे कानून की सीमाओं से परे जाकर भी न्याय प्रदान करने में सक्षम बनाती है। उदाहरण:
- राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद मामला (2019): विवादित भूमि रामलला को दी गई और मुस्लिम पक्ष को वैकल्पिक भूमि आवंटित की गई।
- सहारा-SEBI मामला: निवेशकों को धन वापसी के लिए आदेश।
- सांसद रिश्वत प्रतिरक्षा समाप्ति (2024): सांसदों को रिश्वत के लिए प्रतिरक्षा से वंचित किया गया।
हाल की घटनाएँ (2024-2025)
1. चुनावी बॉन्ड योजना (फरवरी 2024):
सर्वोच्च न्यायालय ने इस योजना को असंवैधानिक घोषित किया, क्योंकि यह पारदर्शिता और सूचना के अधिकार का उल्लंघन करती थी। इसने राजनीतिक चंदे में पारदर्शिता को बढ़ावा दिया और काले धन के उपयोग पर रोक लगाई।
2. सांसदों/विधायकों की रिश्वतखोरी पर प्रतिरक्षा समाप्त (मार्च 2024):
1998 के फैसले को पलटते हुए, न्यायालय ने कहा कि सांसदों को संसद में रिश्वत के लिए कोई प्रतिरक्षा नहीं मिलेगी। यह भ्रष्टाचार के खिलाफ और संसद की गरिमा के लिए बड़ा कदम था।
3. तमिलनाडु बनाम राज्यपाल (अप्रैल 2025):
न्यायालय ने राज्यपाल को निर्वाचित सरकार की सलाह मानने और विधानसभा द्वारा पुनः पारित विधेयकों को रोकने का अधिकार न होने का आदेश दिया। यह संघीय ढांचे और लोकतांत्रिक जनादेश की रक्षा का उदाहरण है।
आलोचनाएँ और चिंताएँ
1. न्यायिक अतिक्रमण (Judicial Overreach):
जब न्यायपालिका नीति-निर्माण या प्रशासनिक मामलों में हस्तक्षेप करती है, तो इसे अतिक्रमण माना जाता है। उदाहरण के लिए, प्रशासनिक नियुक्तियों या नीतियों पर निर्देश देना।
2. लोकतंत्र में असंतुलन:
बार-बार संसद के कानूनों को रद्द करने से तीनों स्तंभों के बीच संतुलन बिगड़ सकता है। यह संसद की संप्रभुता पर सवाल उठाता है।
3. अनुच्छेद 142 का दुरुपयोग:
इसकी अस्पष्ट सीमाओं के कारण अत्यधिक शक्ति का खतरा है, जो न्यायपालिका को अधिनायकवादी बना सकता है।
निष्कर्ष
सर्वोच्च न्यायालय 'सुपर संसद' नहीं, बल्कि संविधान का रक्षक है। यह संसद से ऊपर नहीं, पर संविधान की सर्वोच्चता सुनिश्चित करता है। इसकी शक्तियाँ, जैसे न्यायिक पुनरावलोकन, जनहित याचिका, और अनुच्छेद 142, इसे मौलिक अधिकारों और लोकतंत्र की रक्षा के लिए सशक्त बनाती हैं। हालाँकि, इसका अति-हस्तक्षेप लोकतंत्र के संतुलन को प्रभावित कर सकता है। इसलिए, न्यायपालिका को अपनी शक्ति का विवेकपूर्ण और संतुलित उपयोग करना चाहिए ताकि लोकतंत्र स्वस्थ और स्थायी रहे।
प्रस्तावना परंपरा लोगों को किसी भी अत्याचार से समझौता करा सकती है, और फैशन उन्हें किसी भी मूर्खता को अपनाने के लिए प्रेरित कर सकता है।
जॉर्ज बायरन की ये बातें इस शीर्षक पर बिल्कुल सटीक बैठता हैं। भारतीय समाज विकास के आसमान पर रहा है जिसमे कुछ लोग आधुनिक मूल्यों को जल्दी ही प्राप्त कर लिए और कुछ लोग अभी भी परम्परागत मूल्यों के चिपके हुए है। इसके कारण समाज की गतिशीलता में विसंगति देखी जाती है। आधुनिक मूल्य वालो को प्राचीन सोच वाले बिगड़े हुए मानते है, वही प्राचीन वालो को आधुनिक मूल्य वाले लोग पिछड़े हुए मानते है। अब हमे इसी पर विचार करना है कि वर्तमान आधुनिक जीवन में कौन- से मूल्य सही है और कौन- से गलत।









